छत्तीसगढ़

ग्रीष्मकालीन तिलहन खेती से समृद्धि की ओर अग्रसर किसान

Shantanu Roy
7 April 2026 11:01 PM IST
ग्रीष्मकालीन तिलहन खेती से समृद्धि की ओर अग्रसर किसान
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छग
Raipur. रायपुर। महासमुंद जिले के विकासखंड सरायपाली के ग्राम सिरशोभा में प्रगतिशील किसान श्री गौतम पटेल ने पारंपरिक धान की खेती के स्थान पर ग्रीष्मकालीन सूर्यमुखी अपनाकर खेती में समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। कृषि विभाग लगातार किसानों को ग्रीष्मकालीन तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग प्रदान कर रहा है।
श्री पटेल ने बताया कि पहले वे धान की खेती करते थे, जिसमें अधिक पानी और लागत की आवश्यकता होती थी। बीते वर्ष जल की कमी के कारण फसल प्रभावित होने से उन्हें आर्थिक हानि उठानी पड़ी। इसके बाद कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने इस वर्ष लगभग 1.5 एकड़ क्षेत्र में सूर्यमुखी की खेती की।
सूर्यमुखी की फसल में कम पानी और कम लागत की आवश्यकता होती है, जिससे यह किसानों के लिए लाभकारी विकल्प साबित हो रही है। वर्तमान में फसल की स्थिति संतोषजनक है और प्रति एकड़ 8 से 10 क्विंटल उत्पादन का अनुमान है। कुल उत्पादन 12 से 15 क्विंटल होने की संभावना है। बाजार मूल्य 4500 से 5500 रुपए प्रति क्विंटल के अनुसार, लगभग 54 हजार से 82 हजार 500 रुपए की आय संभावित है। इसमें 40 से 65 हजार रुपए तक शुद्ध लाभ मिलने का अनुमान है। कृषि विभाग द्वारा उन्नत बीज, तकनीकी परामर्श और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने से किसान नवीन खेती पद्धति को सफलतापूर्वक अपना रहे हैं। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ग्रीष्मकालीन तिलहन की खेती जल संरक्षण, कम लागत और अधिक लाभ की दृष्टि से किसानों के लिए उपयुक्त है।
श्री पटेल के अनुभव से यह भी स्पष्ट होता है कि पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक फसल अपनाकर किसान न केवल आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं, बल्कि स्थायी आय और समृद्धि भी सुनिश्चित कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्यमुखी जैसी ग्रीष्मकालीन फसलें किसानों को जल संकट और लागत बढ़ोतरी के प्रभाव से सुरक्षित रखने में सहायक हैं। इस पहल के माध्यम से महासमुंद जिले के अन्य किसान भी ग्रीष्मकालीन फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि विभाग की लगातार तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन से किसान नवीन खेती पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन और लाभ दोनों बढ़ा सकते हैं।
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